कार्यालय अध्यक्ष/आहरण वितरण अधिकारी के कर्तव्य एवं दायित्व

राज्य सरकार के सभी कार्यालयों के कार्य निष्पादन के उद्देश्य से कई प्रकार के नियम बनाये गये हैं इन नियमों के अनुसार ही सरकार की कार्यव्यवस्था का संचालन होता है। कार्यालयों में विभिन्न कार्यों के लिए सरकारी खजाने से राशि के आहरण करने एवं उसका वितरण करने संबंधी कार्यों को नियमानुसार व सही तरीके से सम्पादन करने के उद्देश्य से प्रत्येक कार्यालय में कार्यालय अध्यक्ष एवं आहरण वितरण अधिकारी घोषित किया जाता है ।

कार्यालय अध्यक्ष से ऐसा राजपत्रित अधिकारी अभिप्रेत है जो सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम के नियम 3 (ए) के अनुसार विभागाध्यक्ष द्वारा घोषित किया गया है । एक ही कार्यालय के लिए एक से अधिक राजपत्रित अधिकारी को कार्यालय अध्यक्ष घोषित नहीं किया जायेगा।

आहरण वितरण अधिकारी से ऐसा राजपत्रित अधिकारी अभिप्रेत है जिसे सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम 3 (बी) के अनुसार वेतन एवं भत्ते सहित बिलों पर हस्ताक्षर करने, उन्हें आहरित करने विनिर्दिष्ट सीमा तक व्यय करने तथा कार्यालय अध्यक्ष की ओर से भुगतान करने के लिए कार्यालय अध्यक्ष द्वारा अधिकृत किया गया हो।

आहरण वितरण अधिकारी

कार्यालय अध्यक्ष अपने अधीन सेवा करने वाले किसी भी राजपत्रित अधिकारी को उसके नाम की सूचना एवं नमूने के हस्ताक्षरों को संबंधित कार्यालय में भिजवाते हुये, सिवाय राजपत्रित अधिकारियों के वेतन एवं भत्तों से संबंधित बिलों या आदेशों के किसी भी बिल या आदेश पर कार्यालय अध्यक्ष की ओर से हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा। इससे कार्यालयध्यक्ष बिल के सही होने के लिए या भुगतान के लिए स्वयं की जिम्मेदारी से किसी भी रूप में मुक्त नहीं होगा।

कार्यालय अध्यक्ष एवं आहरण वितरण अधिकारी का कार्य बहुत ही संवेदनशील होता है। अतः यह कार्य करने वाले अधिकारी को सभी प्रकार के नियमों / राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी परिपत्र/निर्देशों को पूर्ण ध्यान में रखते हुए ही कार्य करना चाहिये। चूंकि इनके कार्य के साथ वित्तीय व्यवस्थायें जुड़ी हुई होती है एवं सरकार के खजाने से राशि आहरित कर उसके भुगतान संबंधी कार्य किये जाते हैं जिनमें सबसे अधिक गवन, अनियमितताएं आदि होने की संभवानाएं होती है।

अतः कार्यालय अध्यक्ष एवं आहरण वितरण अधिकारी के मुख्य रूप से निम्नानुसार कार्य एवं दायित्व होते हैं अतः यह कार्य करते समय निम्न बिन्दुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिये-

1. यह सुनिश्चित किया जावेगा कि सरकारी खजाने से आवश्यकता से अधिक की राशि आहरित नहीं की गयी है तथा अधिक नकद शेष भी नहीं रखा गया है ।

2. राशि का आहरण एवं भुगतान के संबंध में सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम 8 पालना अवश्य की जावें।

3. जब तक किसी विधि या नियमों या विधि का प्रभाव रखने वाले आदेश द्वारा अभिव्यक्त रूप से अधिकृत न किया जाए वित्त विभाग की सहमति के बिना, धनराशि को अन्यत्र निवेश या जमा कराने के लिए सरकारी खाते से नहीं निकाला जावें।

 4. राशि जब ही आहरित की जावें जब भुगतान करने की तुरन्त आवश्यकता हो एवं इस हेतु सक्षम स्तर से स्वीकृति / आदेश जारी कर दिये गये हो।

5. आवंटित बजट को लेप्स होने से बचाने के उद्देश्य से राशि कभी भी आहरित नहीं की जानी चाहिये।

6. लोक निधियों (Public Funds) में से तब तक कोई राशि व्यय नहीं की जावें जब तक कि उस व्यय के लिए सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा स्वीकृति एवं आदेश जारी नहीं किये गये हो एवं सरकार द्वारा इस हेतु पर्याप्त मात्रा में उस वित्तीय वर्ष में अनुदान एवं विनियोगों में उपबंध न किया गया हो।

 7. कपटपूर्ण आहरण/भुगतान या कार्यालय में पायी गयी लोकराशि, विभागीय राजस्व या प्राप्तियों, स्टाम्प, सामान आदि के नुकसान की रिपोर्ट सक्षम स्तर पर तुरन्त दी जावें। इस प्रकार की सूचनाओं के संबंध में जी.ए. 163 के अनुसार एक रजिस्टर संधारित किया जावें।

8. सरकार को देय समस्त राशियां नियमित एवं तुरन्त निर्धारित की जावें, उसकी वसूली की जावें, लेखा-जोखा रखा जावें तथा समय पर विधिवत जमा करवा दी जावें।

9. कार्यालय में प्राप्तियों एवं भुगतानों के लेखों की आन्तरिक जांच करवाई जावें।

10. रोकड़ पुस्तिका (Cash book) दैनिक रूप से संधारित की जावें प्रत्येक लेन-देन के इन्द्राज की जांच की जावें एवं प्रत्येक दिन का शेष निकाला जावें। इसकी जांच कनिष्ठ लेखाकार/ लेखाकार से करवाई जानी चाहिए।

11. महिने के अन्त में रोकड़ शेष की जांच अवश्य की जाकर रोकड़ पुस्तिका में प्रमाण-पत्र अवश्य लगाया जावें।

12. प्रपत्र जी.ए. 48 में रोकड़ पुस्तिका तथा प्रपत्र जी.ए. 51 में मनीऑर्डस्स चैको, ड्राफ्टों आदि का विवरण अंकित करते हुये रजिस्टर संधारित किया जावें।

13. स्थायी अग्रिम आदि में से दिया गया अस्थायी अग्रिम का इन्द्राज लाल स्याही से किया जावें एवं समय पर वसूली की जावें यदि अस्थायी अग्रिम संबंधित द्वारा जमा नहीं करवाई जाती है तो वेतन में से निर्धारित ब्याज राशि सहित काटकर इन्द्राज किया जावें।

14. लेखा परीक्षा की आपत्तियों एवं वसूलियों पर तुरन्त ध्यान देना चाहिये एवं उसकी पूर्ति उपरांत अनुपालना अवश्यक भिजवाई जावें।

15. लेखा परीक्षा द्वारा कोई वसूली के आदेश दिये जाते हैं एवं संबंधित का स्थान्तरण किसी अन्य कार्यालय में हो गया है तो उस कार्यालय अध्यक्ष/आहरण वितरण अधिकारी को तुरन्त सूचित कर राशि की वसूली की कार्यवाही की जावें।

16. वसूली योग्य राशि को अपलेखन करने की शक्तियां मुख्य लेखाधिकारी / वरिष्ठ लेखाधिकारी/ लेखाधिकारियों को प्रत्यायोजन की गई है अतः तदानुसार अपलेखन होने पर आदेशों के अनुसार कार्यवाही की जावें।

17. नकद की सुरक्षा एवं अभिरक्षा के लिए समुचित व्यवस्था करना एवं नकद शेषों की आकस्मिक जांच करना।

18. कोषागार से प्राप्तियों के मासिक पुनर्मिलान की व्यवस्था करना। 19. केशियर द्वारा बैंको से बिलों का भुगतान प्राप्त करने की व्यवस्था को ध्यान में रखना एवं उसको पहचान-पत्र जारी करना।

20. बिल प्रेषण पंजिका का उचित संधारण करना तथा समय पर जांच करना।

21. बिलों/चैक के खोने की सूचना तुरन्त बैंक एवं ट्रेजरी को देकर भुगतान रुकवाना।

22. सेवा पुस्तिका में सेवा सत्यापन की प्रविष्टियां करना ।

23. सवेतन बिलों में से निर्धारित कटौतियां नियमों के अनुसार अवश्य करना।

24. महालेखाकार/ विभाग में पदस्थापित वित्तीय अधिकारी द्वारा दर्शायी गयी आपत्तियों एवं आदेशों के आधार पर भुगतान को नामंजूर करना, उनसे वसूलियां करना।

25. प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को वर्ष में की गई कटौतियों का एक प्रमाण-पत्र जारी करना।

26. समय बाधित (Timebard) बिलों के भुगतान से पूर्व सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त करना।

27. यह सुनिश्चित करना कि अवितरित वेतन एवं भत्ते व अन्य राशि को अन्य किसी प्रयोजन में तो काम में नहीं लिया जा रहा है । निर्धारित समय से अधिक के लिए राशि को नहीं रखी जावें।

28. सरकारी कर्मचारियों को दिये गये अल्पकालीन अग्रिम, ऋण आदि के संबंध में लेखों का संधारण व उनकी नियमित वसूली करना।

29. नकद को सम्भालने वाले सरकारी कर्मचारियों से समुचित प्रतिभूति समय पर प्राप्त करना।

30. सरकारी कर्मचारियों को वेतन एवं भत्ते व अन्य नियमानुसार सुविधाओं की राशि का भुगतान समय पर किया जाना।

31. सभी प्रकार के वित्तीय लेन-देन संबंधी रिकार्ड वर्षवार सही तरीके से संधारित करना एवं उनकी अंकेक्षण संबंधी व्यवस्था समय पर करवाया जाना। 

32. राज्य सरकार द्वारा जारी परिपत्रों / निर्देशों/ आदेशों आदि का ध्यान रखना एवं तदनुसार ही कार्यवाही करना।

(कार्यालय अध्यक्ष/आहरण वितरण अधिकारी के कर्तव्य एवं दायित्व)

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