विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक: शिविरा-माध्य/मा/स/22423/2001-02 दिनांक 21 जनवरी 2015 एवं समसंख्यक आदेश दिनांक 27.02.2015 के द्वारा कक्षा 1 से 8 के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति (एस.एम.सी.) एवं कक्षा 9 से 10/कक्षा 9 से 12 के लिए विद्यालय विकास कोष एवं प्रबंध समिति (एस.डीएम.सी.) के गठन एवं आय-व्यय पर नियन्त्रण रखने लेखे संधारित करने बाबत विवरण अंकित किया गया है ताकि वर्णित समितियों द्वारा प्रभावी तरीके से कार्यों का निष्पादन किया जा सके । विभाग के अंतर्गत कक्षा 1 से 12 तक के समन्वित विद्यालयों के संचालन हेतु राज्य सरकार के परिपत्र क्रमांक प.4(6) शिक्षा-1/2014 जयपुर दिनांक 11.02.2015 के क्रम में जारी किया गया है ताकि विद्यालयों में स्वच्छ शैक्षिक वातावरण में विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान की जा सके। प्रायः देखने में आया है कि राजकीय विद्यालयों में छात्र कोष एवं विद्यालय विकास कोष में राशि उपलब्ध होने के बावजूद भी संस्था प्रधान राशि का उपयोग नहीं करते हैं अथवा विकास समिति, शिक्षक अभिभावक संघ, विद्यालय स्टाफ एवं स्थानीय समुदाय का आपस में समुचित समन्वय नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को प्रभावी स्वच्छ शैक्षिक वातावरण हेतु वांछित सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। यह भी देखने में आया है कि छात्रकोष एवं विद्यालय कोष में पर्याप्त राशि उपलब्ध होने के बावजू द भी विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव रहता है, जो अत्यन्त शोचनीय विषय है। छात्रकोष/विकास कोष के सामयिक, समुचित एवं विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में गुणवत्ता अभिवृद्धि उद्देश्य से उपयोग हेतु निम्नानुसार दिशा निर्देश दिये गये हैः-


1 . कार्य योजना – सत्रांत में विद्यालय के अगले सत्र की आवश्यकताओं का आकलन कर विद्यालय प्रबंधन/विद्यालय विकास कोष एवं प्रबंधन समिति, छात्र-अभिभावक संघ, विद्यालय स्टाफ, प्रतिभावन विद्यार्थियों एवं गठित समिति सदस्यों से विचार विमर्श कर कार्य योजना का निर्धारण किया जाए। सामयिक समीक्षा के दौरान कार्य योजना में शैक्षिक गुणात्मक सुधार से संबंधित बिन्दुओं पर अपेक्षित संशोधन हेतु संस्था प्रधान को पूर्ण स्वायत्तता होगी। कार्ययोजना में विद्यार्थियों के प्रभावी शिक्षण हेतु शिक्षण अधिगम सामग्री, खेलकूद सामग्री व बैठक व्यवस्था फर्नीचर, दरी-पट्टी आदि के क्रय के साथ-साथ पीने के पानी की व्यवस्था, बालक-बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक शौचालय का निर्माण, मरम्मत, रख-रखाव एवं विद्यालय परिसर सहित उनकी सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जायेगी।
2 . राशि का उपयोग – छात्रकोष/विकास कोष के सू चित उपयोग की दृष्टि से प्रत्येक विद्यालय स्तर पर गठित विद्यालय प्रबं धन समिति अथवा विद्यालय विकास कोष एवं प्रबंधन समिति उत्तरदायी होगी। यह समिति छात्रकोष शुल्क/विकास कोष शुल्क के उपयोग हेतु प्रतिवर्ष आवश्यकताओं के परिप्रेक्ष्य में प्राथमिकता तय करेगी, जिससे विद्यालय का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके । यथा संभव संस्था प्रधान इस कोष से स्वयं के कार्यालय पर व्यय नहीं कर सकेंगे। छात्रहित से संबंधित कार्यों को प्रथम प्राथमिकता प्रदान कर आदर्श वित्तीय मानकों/नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से राशि व्यय कर सकेंगे। कार्य योजना के अनुरूप व्यय की जाने वाली राशि के प्रस्ताव का संबंधित समिति से स्वीकृति के बिना व्यय किये जाने पर कार्योत्तर स्वीकृति के पश्चात ही किया हुआ व्यय नियमित माना जायेगा।

छात्र कोष/विकास कोष(Student Fund/Development Fund) से किये जाने योग्य कार्य – विद्यालय प्रबन्धन समिति अथवा विद्यालय विकास कोष एवं प्रबन्धन समिति से अनुमोदन पश्चात शैक्षिक गुणवत्ता सुधार, विद्यार्थियों हेतु बैठक व्यवस्था, पीने के पानी व बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ टाॅयलेट्स की उपलब्धता हेतु नियत किये गये समस्त कार्य छात्र कोष/ विकास कोष से कराये जा सके ंगे। विद्यार्थियों का अध्ययन सुचारू रूप से चलाने तथा व्यय की जाने वाली राशि की सार्थकता के परिपेक्ष्य में संस्था प्रधान की सुविधा हेतु प्रस्तावित कार्यों की सूची निम्नानुसार है:-


छात्रकोष (Student Fund) की राशि से किये जाने वाले कार्य

  • विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संख्या में दरी पट्टी, डेस्क एवं टेबल कुर्सी की स्तर अनुसार व्यवस्था।
  • कक्षा-कक्ष संचालन हेतु चाॅक, डस्टर, सहायक शिक्षण सामग्री व पोस्टर्स, आदि की व्यवस्था।
  • उच्च गुणवत्ता वाले फाईबर बोर्ड/हरित पट्ट।
  • बच्चों के प्रवेश पर नव प्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत, विद्यालय पहचान पत्र बनवाना व अच्छा कार्य करने वाले लोकसेवक/एनजीओ का सम्मान।
  • परिसर, कक्षा-कक्ष में रंग रोगन/वाॅल पैंटिंग। कक्षा 1 से 5 के लिए लहर कार्यक्रम की भांति, कक्षा 6 से 8 के लिए सामान्य ज्ञान एवं जानकारी एवं कक्षा 9 से 12 के लिए महापुरुषों के चित्र विभागीय योजनाएं, भामाशाह एवं विद्यार्थियों का विवरण, महापुरुषों के नाम, छात्रवृत्ति व अन्य योजनाओं का विवरण विद्यालयों में उपयुक्त स्थानों पर अंकित कराया जाना।
  • खेलकूद प्रवृत्तियों के लिए सामग्री यथा-फुटबाॅल, वाॅलीबाल, बास्केटबाॅल नेट आदि।
  • खेलकूद प्रतियोगिताएँ, छात्र प्रवृतियां, सांस्कृतिक प्रवृतियां, सामाजिक प्रवृतियां, मनोरंजन, उत्सव, समारोह, पुरस्कार, शाला पत्रिका, अतिथि सत्कार, निमंत्रण पत्र आदि।
  • समान/गृह परीक्षा संचालन व्यय।
  • शारदे बालिका छात्रावासों की बालिकाओं हेतु शैक्षिक गतिविधियां।
  • समाज उपयोगी उत्पादक कार्य (एस.यू.पी.डब्ल्यू) एवं कार्यानुभव गतिविधियां।
  • पुस्तकालय-वाचनालय हेतु प्रत्येक विद्यालय में समाचार पत्र हिन्दी/अंग्रेजी, पाक्षिक पत्र-पत्रिका छोटे बच्चों की पत्रिकाएं/महापुरुष की जीवनियाँ व अन्य पुस्तकों की व्यवस्था।
  • विद्यालय प्रार्थना सभा एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए माईक, हारमोनियम, तबला, ढोलक, रंगोली निर्माण सामग्री, रंगोली बनाने की पुस्तकें आदि।
  • विद्यार्थियों के प्रगति रिपोर्ट कार्ड की व्यवस्था।
  • कक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को प्रमाण पत्र व पुरस्कार।
  • प्रत्येक परख व परीक्षा समाप्ति के 7 दिवस की अवधि में अभिभावक के साथ संवाद (पीटीए बैठक) व फोटोग्राफी।
  • कक्षा 8 से 12 तक प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों की ग्राम / कस्बे के मुख्य मार्ग से रैली निकालना एवं फोटोग्राफी।
  • विधवा/परित्यक्ता/विशेष योग्यजन अभिभावकों के बच्चों को निःशुल्क विद्यालय पोशाक-कपड़े जूते व मोजे तथा स्कूल बैग-कक्षा 1 से 5 ।
  • कमरों में पंखे, वाटरकू लर, वाटर प्यूरीफायर एवं ठण्डे पानी हेतु फ्रीज की व्यवस्था एवं विद्युत बिल/पानी का बिल/टेलीफोन बिल का भुगतान।
  • विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, खेलकूद, शिक्षा उन्नयन, शोधकार्य आदि को प्रो त्साहित किये जाने की दशा में तीन माह में एक वाक्पीठ।
  • विद्यालय सूचना पट्ट एवं साईन बोर्ड आकर्षक तरीके से बनवाने व ज्ञानार्थ-प्रवेश, सेवार्थ-प्रस्थान संबंधी पेंटिंग आदि।

विद्यालय विकास कोष (School Development Fund) संबंधी कार्य

  1. स्कूल परिसर (बाहर-अन्दर) पेड़ कटाई-छंटाई।
  2. कक्षा-कक्षों की माईनर रिपेयर (सामान्य मरम्मत) यथा-किवाड़, खिड़ की, बिजली फिटिंग टूटफूट, पानी लाईन माईनर सिविल वर्क।
  3. बालिकाओं हेतु संचालित शारदे बालिका छात्रावासों का विकास।
  4. विद्यालय परिसर में माँ सरस्वती की प्रतिमा का निर्माण।
  5. पूर्व में संचालित विकास योजनाओं से डबटेल (जोड़ बैठाकर) कर विद्यालय में विकास कार्य।
  6. विद्यालय परिसर में पेयजल, हैण्डपम्प आदि का निर्माण (जन सहयोग व विकास योजनाओं से)
  7. निर्माण कार्यों में खेलकूद मैदान चारदीवारी, वाॅलीबाॅल, बास्केटबाॅल कोर्ट व आडिटोरियम आदि का निर्माण।

पर्यवेक्षण- संस्था प्रधान प्रत्येक माह के अन्त में छात्र कोष में उपलब्ध राशि की समीक्षा के लिए उत्तरदायी होंगे। विद्यालय पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण से संबंधित अधिकारी भी अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में छात्र कोष की राशि के संबंध में टिप्पणी अंकित करेंगे तथा विद्यालय का प्रभावी संचालन/विद्यार्थियों के हित को दृष्टिगत रखते हुए छात्र कोष/विकास कोष के उपयोग हेतु आवश्यक होने पर संस्था प्रधान को निर्देश देने के लिए अधिकृत होंगे। जिला शिक्षा अधिकारी-माध्यमिक/उप निदेशक (माध्यमिक) एवं निदेशालय के अधिकारी निरीक्षण के दौरान छात्र कोष/विकास कोष की राशि के उपयोग की स्थिति की समीक्षा करेंगे तथा निरीक्षण प्रतिवेदन में इसका उल्लेख करेंगे, जिससे इस राशि का विद्यालय/विद्यार्थियों के लिए प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके ।

जिला शिक्षा अधिकारी संबंधित शाला प्रधानों से प्रत्येक माह के अन्त में निम्नांकित प्रारूप में सूचना प्राप्त कर विद्यालयवार अवशेष राशि व विद्यालय योजना के अनुसार प्रस्तावित कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे तथा समीक्षा पश्चात आवश्यक निर्देश संस्था प्रधानों को जारी करेंगे जिससे विद्यालय स्तर पर विद्यालयों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके।