परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को देय सुविधाएँ एवं अवकाश (Service rules for Probationer trainees in Rajasthan)

शिविरा पत्रिका –

लेखा-स्तम्भ

परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को देय सुविधाएँ एवं अवकाश (Service rules for Probationer trainees in Rajasthan)

1. परिवीक्षाधीन (Probationer):

‘राजस्थान सेवा नियम-1951’ के नियम-7 (30) के अनुसार परिवीक्षाधीन से तात्पर्य उस कर्मचारी से है, जो किसी सेवा अथवा संवर्ग में स्थाई रूप से एक रिक्त पद पर नियमित रूप से नियुक्त किया गया है।

2. परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी (Probationer Trainee):

‘राजस्थान सेवा नियम-1951’ के नियम-7 (30ए) के अनुसार परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी से तात्पर्य एक ऐसे व्यक्ति से है, जो सीधी भर्ती द्वारा एक स्पष्ट रिक्त पद के विरुद्ध सेवा अथवा संवर्ग में स्थिर पारिश्रमिक पर दो वर्ष या वृद्धि की कालावधि यदि कोई हो, प्रशिक्षणार्थी के रूप में नियुक्त किया गया है। सेवा नियमों में उक्त प्रविष्टि वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांकः F.1(2)FD/Rules/ 2006, Dated:13- 3-2006 के अनुसरण में ‘राजस्थान सेवा नियम-1951 के मौजूदा नियम-8 (राजकीय सेवा में प्रथम नियुक्ति पर आयु से संबंधित विद्यमान नियम-8 को 8 A के रूप में अंकन किया गया) के स्थान पर प्रतिस्थापित करते हुए की गई, जो कि दिनांक: 20.01.2006 या उसके पश्चात् राजकीय पद पर नियुक्त कार्मिकों के लिए प्रभावी है। के मौजूदा नियम-8 (राजकीय सेवा में प्रथम नियुक्ति पर आयु से संबंधित विद्यमान नियम-8 को 8 A के रूप में अंकन किया गया) के स्थान पर प्रतिस्थापित करते हुए की गई, जो कि दिनांक: 20.01.2006 या उसके पश्चात् राजकीय पद पर नियुक्त कार्मिकों के लिए प्रभावी है।

 परिवीक्षा की कालावधि (Period of Probation)-

वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांकः F.1(2)FD/ Rules/2006, Dated: 13-3-2006 द्वारा सेवा नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि दिनांक: 20.01.2006 या उसके पश्चात् राजकीय पद पर स्पष्ट रिक्ति के विरुद्ध सीधी भर्ती द्वारा सेवा में प्रवेश करने बाले किसी व्यक्ति को 2 वर्ष की कालावधि के लिए परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी के रूप में रखा जाएगा। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न अधिसूचनाओं / आदेशों द्वारा कुछ विशिष्ट सेवाओं/पदों हेतु परिवीक्षा की कालावधि दो वर्ष के स्थान पर एक वर्ष की गई। उदाहरणार्थ वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांकः F.1(2)FD/Rules/ 2006, Dated:26- 12-2011 एवं 03-07-2014 द्वारा ‘राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा’ के चिकित्साधिकारी एवं राजस्थान चिकित्सा (महाविद्यालय शाखा) सेवा’ के वरिष्ठ प्रदर्शक/सहायक आचार्य पदों हेतु परिवीक्षा कालावधि दो वर्ष के स्थान पर एक वर्ष की गई। इसी प्रकार वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांकः F.12 (6)FD/ Rules/2005, Dated:23-09- 2014 द्वारा राज्य सेवा के प्रारंभिक पद से उच्च पद, जिसमें अकादमिक/प्रोफेशनल एवं विशिष्ट अनुभव आवश्यक है, नियुक्ति पर परिवीक्षा अवधि एक वर्ष की गई।

परिवीक्षा की कालावधि में देय पारिश्रमिक एवं सुविधाएँ (Remuneration during Probation period) ‘

राजस्थान सेवा नियम-1951 के नियम 8 के तहत 20 जनवरी 2006 या इसके पश्चात् राजकीय सेवा में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को दो वर्ष की कालावधि के परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी के रूप में रखा जाएगा एवं परिवीक्षा प्रशिक्षण के दौरान की अवधि में उसे नियत पारिश्रमिक संदत्त किया जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर नियत किया जाए। परिवीक्षा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक समाप्ति के पश्चात् उसे चालू वेतन बैंड और ग्रेड वेतन में वेतन अनुज्ञात किया जाएगा। परिवीक्षाधीन प्रशिक्षण की कालावधि को वेतन वृद्धि के लिए नहीं गिना जाएगा।

  1. परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को परिवीक्षा की कालावधि के अन्तर्गत नियत पारिश्रमिक (Fixed remuneration) के अन्तर्गत अन्य किसी भी प्रकार के भत्ते (विशेष भत्ता, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता, बोनस आदि) देव नहीं होंगे।
  2.  परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को कार्यग्रहण काल एवं कार्यग्रहण करने के लिए यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। यदि वह कर्तव्य के लिए यात्रा करता है, तो उसे दौरे के लिए देय नियमानुसार यात्रा भत्ता देय होगा। स्थानांतरण होने पर उसे मील भत्ता तथा आनुषांगिक प्रभार नियत पारिश्रमिक के आधार पर देय होगा।
  3.  स्थिर पारिश्रमिक में से बीमा एवं जी.पी.एफ. की कटौती नहीं होगी।
  4. परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को यदि प्रतिनियुक्ति पर वैदेशिक सेवा में प्रशिक्षण के लिए लगाया जाता है, तो उसे प्रतिनियुक्ति भत्ता देय नहीं होगा।

नियमित राज्य सेवा में चल रहे परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को देय वेतन (‘राजस्थान सेवा नियम- 1951’ के नियम 24 के अन्तर्गत):

एक राज्य कर्मचारी, जो पूर्व से ही नियमित राजकीय सेवा में है, यदि दो वर्ष के लिए परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी के रूप में 20 जनवरी 2006 को या इसके पश्चात् नियुक्ति होता है तो उसे राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर देय पूर्व मद के स्वयं के वेतनमान में देय वेतन या परिवीक्षा की अवधि में देय नियत पारिश्रमिक में से, जो भी उसके लिए लाभकारी हो, वेतन देय होगा।

परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी, जो अपने से पूर्व के पद के चालू वेतन बैंड में वेतन एवं ग्रेड वेतन प्राप्त करने का विकल्प प्रस्तुत करता है, तो उसे परिवीक्षाधीन अवधि में पूर्व के पद के विद्यमान वेतनमान में वार्षिक वेतनवृद्धि देय होगी तथा प्रशिक्षण स्थान का मकान किराया भत्ता देय होगा। नियमित राज्य कर्मचारी, जिसने राजकीय सेवा में सेवा के 3 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं, तो वह कार्यग्रहण काल एवं इस कालावधि के वेतन के लिए पात्र होगा तथा जिन कर्मचारियों ने 3 वर्ष की सेवा पूर्ण नहीं की है, उन्हें केवल कार्यग्रहण काल ही देय होगा तथा कार्यग्रहण काल का वेतन देय नहीं होगा। परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर उसका वेतन पूर्व पद और ग्रेड वेतन के प्रति निर्देश से समान स्टेज पर नये पद के चालू वेतन बैंड में नियत किया जाएगा।

परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को देय अवकाश (Leave Rules for Probationer Trainees in Rajasthan):-

आकस्मिक अवकाशः परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को एक कलैण्डर वर्ष में 12 दिवस का आकस्मिक अवकाश देय होगा। कलैण्डर वर्ष की अपूर्णता की स्थिति में आनुपातिक आधार पर उसके द्वारा प्रत्येक पूर्ण माह की सेवा के एवज में एक आकस्मिक अवकाश का लाभ देय होगा। प्रशिक्षण अवधि के सफलतापूर्वक समापन पश्चात् स्थाईकरण होने पर स्थाईकरण तिथि से नियमित राज्य कर्मचारियों को देय अवकाश सुविधा का पात्र होगा। ‘राजस्थान सेवा नियम- 1951’ के नियम-122 ए के प्रावधानान्तर्गत पूर्व से ही नियमित राजकीय सेवा में चल रहे परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थियों सहित परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी परिवीक्षा की कालावधि में अन्य किसी भी प्रकार का अवकाश अर्जित नहीं करेगा।

स्पष्टीकरणः राज्य सरकार के वित्त (नियम) विभाग की आई.डी. संख्या- 221201396, दिनांकः 12.10.2012 के द्वारा प्रदत्त स्वीकृति के क्रम में शासन उप सचिव-प्रथम, शिक्षा (ग्रुप-2) विभाग के पत्रांकः प.17 (2) शिक्षा- 2/2008, दिनांकः 18.10.12 द्वारा प्रदत्त मार्गदर्शनानुसार नव नियुक्त परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी, जो पूर्व से ही राज्य कर्मचारी होने के कारण उनके अवकाश खाते में पूर्व अर्जित अवकाश स्वत्व बकाया है, को पूर्व अर्जित अवकाश उपयोग की अनुमति दिए जाने का निर्णय संबंधित नियंत्रण अधिकारी द्वारा लिया जाएगा तथा उक्त प्रकार के अर्जित अवकाश का उपभोग करने की अनुमति यदि नियंत्रण अधिकारी द्वारा प्रदान की जाती है, तो ऐसे अवकाश के कारण परिवीक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रसूति एवं पितृत्व अवकाशः (Maternity Leave during Probation Period) वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांकः F.1(6)FD/Rules/2011, Dated:15- 2-2012 द्वारा ‘राजस्थान सेवा नियम- 1951’ के नियम-103 ए को नियम- 122 ए द्वारा निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया गया है:-

नियम-122 ए

  • परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण की कालावधि के दौरान किसी भी प्रकार का अवकाश अर्जित नहीं करेगा।
  •  महिला परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को मौजूदा नियम-103 एवं 104 के तहत प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) स्वीकृत किया जाएगा।
  • पुरुष परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी को मौजूदा नियम-103 ए के तहत पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) स्वीकृत किया जाएगा।

परिवीक्षा अवधि के सफलतापूर्वक समापन एवं पद के नियमित वेतन बैंड एवं ग्रेड पे में वेतन नियतन (Fixation of Salary after probation period) –

परिवीक्षाधीन प्रशिक्षार्थी द्वारा दो वर्ष की परिवीक्षा कालावधि के सफलतापूर्वक समापन पश्चात् नियुक्ति अधिकारी द्वारा कार्मिक को पद का नियमित वेतन बैंड एवं ग्रेड पे अनुज्ञेय है। वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांक: F.1(2)FD/ Rules/06 Part-1. Dated:22-05- 2009 द्वारा परिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थियों को ‘राजस्थान सेवा नियम-1951’ के नियम-96 (बी) के तहत तीन माह तक का असाधारण अवकाश (अवैतनिक) नियुक्त अधिकारी द्वारा स्वीकृत किए जाने की छूट प्रदान की गई थी। उक्तानुसार तीन माह की अवधि तक का असाधारण अवकाश नियुक्ति अधिकारी स्वीकृति की अवस्था में कार्मिक के परिवीक्षा काल में बढ़ोतरी नहीं होती, परन्तु वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांक: F.1(2)FD/Rules/06 Part-1, Dated: 11-06-2014 तथा संशोधित अधिसूचना क्रमांक: F.1(2)FD/ Rules/06 Part-1, Dated: 06-08- 2014 द्वारा उक्त अवधि को तीन माह के स्थान पर 30 दिवस तक सीमित कर दिया गया है। उक्तानुसार वर्तमान में तीस दिवस से अधिक का असाधारण अवकाश लेने पर परिवीक्षा की कालावधि में 30 दिवस से जितने दिन अधिक का असाधारण अवकाश स्वीकृत किया जाता है, उतने दिन हेतु परिवीक्षा काल में वृद्धि होगी। तीन माह तक का असाधारण अवकाश नियुक्ति अधिकारी द्वारा तथा 3 माह से अधिक, लेकिन एक वर्ष की अवधि के लिए असाधारण अवकाश प्रशासनिक विभाग की अनुमति से स्वीकृत हो सकेगा। अपवादिक एवं अपरिहार्य परिस्थितियों में एक वर्ष से अधिक का असाधारण अवकाश कार्मिक एवं वित्त विभाग की पूर्व अनुमति से स्वीकृत किया जा सकेगा।

कार्मिक विभाग की अधिसूचना क्रमांकः F.7(2)DOP/A-II/2005, Dated:26- 04-2011 द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि परिवीक्षा की कालावधि नियमित नियुक्ति मानी जाएगी, जो कि पदोन्नति एवं आश्वासित कैरियर प्रगति (ए.सी.पी.) में सेवावधि की गणना हेतु मान्य होगी।